क्रिकेट खेल य भ्रष्टाचार में लिप्त एक सट्टा का व्यापार ?

क्रिकेट का मैच हारने पर कई लोगों ने जोक बनाये,शेयर किये और क्रिकेट प्रशंसको ने हॉकी को राष्ट्रिय खेल के नाम से सम्बोधित भी किया जो सही भी है क्योंकि बचपन से लेकर आज कई पुस्तकों में हॉकी को राष्ट्रीय खेल का दर्जा प्राप्त है ! कई किताबों में जब ये लिखा हुआ होगा तो जाहिर सी बात है कि उस पुस्तक को पढ़ने वाले लोगों की समझ भी हॉकी को राष्ट्रीय खेल के रूप में समझने की होगी ! कल आयुष शर्मा जी की एक पोस्ट को शेयर किया जो मुझे पसंद आई,उसमे हॉकी को राष्ट्रीय खेल के रूप में उन्होंने बताया था जिसे मै भी समर्थन करता था ! अब उसके बाद कुछ ने बताया कि ये गलत ज्ञान न बांटे ! जानकारी पूरी प्राप्त कर ले ! हॉकी राष्ट्रीय खेल नही है हमारा !! ये बात सुनकर थोड़ा आश्चर्य हुआ तो गूगल किया जिसे बढ़ा ध्यान से पढ़ा !! जो बाते पढ़ी वो आपको सारांश में बताता हूँ !!

२ अगस्त ,२०१२ के न्यूज़ वेबसाइट के स्रोत सूत्रों के अनुसार ऐश्वर्या पराशर ( उम्र १० साल ) ने प्रधानमन्त्री कार्यालय से राष्ट्रीय संगीत,खेल,फूल,गान,पशु,पक्षी की जानकारी प्रधानमन्त्री कार्यालय से आर.टी.आई के तहत मांगी तो प्रधानमन्त्री कार्यालय ने इस प्रश्न का जवाब देने की जिम्मेदारी होम मिनिस्ट्री को अग्रेषित कर दी उसके बाद ये ऐश्वर्या के प्रश्न यूथ अफेयर एंड स्पोर्ट्स को सौंप दिए गये ! ऐश्वर्या के जवाब में उस समय के खेल मंत्रालय के सेक्रेट्री शिव प्रताप सिंह तोमर ने ये अपने जवाब में ये स्पष्ट किया कि अभी तक भारत का कोई राष्ट्रीय खेल क्रिकेट खेल य भ्रष्टाचार में लिप्त एक सट्टा का व्यापार ?निर्धारित नही हुआ है ! जबकि हैरान कर देने वाली बात ये है कि अभी भी कई मीडिया,अख़बार के पन्नो,सरकार में बैठे मंत्री और भारत सरकार के अधिकारिक वेबसाइट पर भी हॉकी को राष्ट्रीय खेल के रूप में बताया गया है ! अब इसे पढ़ने के बाद काफी प्रश्न मन में उभरते है जैसे क्या भारत सरकार को ये बात पहले से नही बतानी चाहिये ? कई न्यूज़ वेबसाइट के अनुसार हॉकी का जन्म भारत में हुआ था और मेजर ध्यानचंद के अभूतपूर्व योगदान के कारण और भारतीय हॉकी का गौरवमयी इतिहास होने के कारण भी इसे लोगो ने राष्ट्रीय खेल के रूप में मान लिया पर ध्यान देने वाली बात ये है कि इतनी बड़ी और महत्वपूर्ण बात सरकार किसी के आर.टी.आई के तहत मांगे हुए जवाब में दे ये अपने आप में हैरान कर देने वाली बात है ! सच को सरकार को बिना किसी के पूछे ही जनता को बताना चाहिए पर यहाँ तो गलत धारणा के शिकार भारतीय लोग अधिकारिक रूप से २०१२ तक बनते रहे और मै कल तक ! अगर हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल नही है तो क्या भारत सरकार इस गुमराह करने वाली बात को नष्ट करने के लिए बड़े पैमाने पर ये नही बता सकती कि भारत का कोई राष्ट्रीय खेल नही है ! जब कोई झूठ य अर्ध्य-सत्य कई बार बोलो तो उस बात को सुनने वाले उसे सच मान लेते है ! इस सच को जब कोई अधिकारिक व्यक्ति य संस्था बताये तो उसे सब स्वीकार कर लेते है तो ऐसे में सरकार क्यों टीवी,सोशल मीडिया,अख़बार,पंचायत,और ऐ.फम जैसे सूचना के माध्यम से इस बात का प्रचार नही करती ?? क्या इसीलिए कि जनता विरोध कर देगी जैसे सुभाष चन्द्र बोस की फाइल के लिए हुआ था ! आज सूचना को सार्वजनिक करने के बहुत माध्यम मौजूद है पर आज जिस तरह से गोपनीय बातो को दबा दिया जाता है वो संदेहस्पद है जैसे कल क्रिकेट मैच में हुआ ! श्री राजीव दीक्षित जी ने क्रिकेट,बी.सी.सी.आई की हकीकत और सरकार,मीडिया के इस भ्रष्टाचार में मिली होने की बात सालो पहले बता दी थी पर देश की जनता इतनी मासूम है कि 

क्रिकेट खेल य भ्रष्टाचार में लिप्त एक सट्टा का व्यापार ?क्रिकेट देखने को देशभक्ति का पर्याय मान लेती है जैसे मानो बॉर्डर पर कब्जा कर लेंगे !! क्रिकेट में और खेलो के एवज में भ्रष्टाचार की असीम सम्भावना है ! अन्तराष्ट्रीय खेलो जैसे फूटबाल का भी भारत के युवाओ में बहुत क्रेज है पर जिसमे भ्रष्टाचार अधिक है उसे ही मीडिया और स्पोंसर करने वाले प्रमोट करते है ताकि जनता को मूर्ख बनाकर उन्हें वन्देमातरम गवाकर निशुल्क प्रचार क्रिकेट का हो सके ! इसमें रजत शर्मा जो अपनी अच्छी छवि का ढोंग करके आप की अदालत में क्रिकेटरों को बुलाकर जो वार्तालाप करवाते है वो अपने आप में एक बड़ा षड्यंत्र प्रतीत होता है ! देश में इतनी समस्या मौजूद हो फिर भी मीडिया कुत्तो की तरह क्रिकेट के बारे में भौंकना शुरू कर दे तो आप समझ सकते है कि जब देश की मीडिया जिसे इतना ऊँचा दर्जा प्राप्त है वो इस चाटुकारिता में लिप्त हो तो सोच सकते है कि कितना बड़ा भ्रष्टाचार इसमें लिप्त है ! हम क्रिकेट खेलने का विरोध नही करते पर क्रिकेट देखने वाले दर्शक,प्रशंसक को कुछ प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित जरुर करेंगे कि क्यों समाज,देश में इतनी समस्या होने के बावजूद क्रिकेट को टीवी में इतनी महत्वता मिलती है ! जो समाचार हम अख़बार में सुनते है वो हमेशा टीवी तक क्यों नही आ पाती ! क्या टीवी मात्र प्राचर करने का बड़ा साधन मात्र ही रह गया है ! मसाले,मैगी,बनियान,सर्फ,साबुन,शैम्पू,मोबाइल ये किसी भी मीडिया चैनल में समाचार से ज्यादा ही दिखाई जाती है वो भी एक चीज कई बार तो क्या ऐसे में इसे न्यूज़ चैनल बोला जाये य ऐड चैनल ये आप खुद समझदार है ! हमारा भारतीय जनता से निवेदन है कि भारत सरकार कि इस लुट को समझे जो क्रिकेट खेल के नाम पर भी है और इसमें कुछ बड़े मीडिया वर्ग बराबर की भागीदार भी है ! जैसे इंडिया टीवी मुख्यतः ! गर्व है कि जी न्यूज़ चैनल ने इसका सार्वजनिक रूप से बहिष्कार करके अपनी देशभक्ति को प्रमाणित किया है पर उस दिन और ख़ुशी होगी जिस दिन श्री राजीव दीक्षित के कुछ व्याख्यान अपने चैनल पर दिखा दे ! भारत की जनता को समझना होगा कि मनोरंजन के नाम पर वो कितने घंटे बर्बाद कर देते है जिसमे अधिकांश पढ़े-लिखे युवा वर्ग है ! यदि कुछ कर्तव्य-निष्ठ लोग भी समाज के अशिक्षित वर्ग को अपने सामर्थ्य और योग्यता अनुसार क्रिकेट देखने के बजाय उन्हें शिक्षित करने की जिम्मेदारी ले ले तो भारत को विश्व गुरु बनने में जरा भी देर नही लगेगी !! 
यदि सुझाव पसंद आये तो क्रिकेट देखने का सम्पूर्ण रूप से बहिष्कार करे !!