आइये करते है दिल्ली मेट्रो की यात्रा – एक अनोखा मजेदार सफर

दिल्ली मेट्रो एक ऐसा माध्यम है यातायात का जो बीते कुछ वर्षो से काफी मददगार साबित हुआ है दिल्ली और उसके निकटवर्ती क्षेत्रो के लिये ! नौकरी पेशा लोगो को कम दाम में समय पर सुरक्षित पहुँचाने वाली ये रेल काफी लोगो के लिये वरदान साबित हुई है ! जिस जिस क्षेत्रो से मेट्रो का गुजरना हुआ वहां के आस पास रोजगार के अवसर मुहैय्या हुए और यही नही जहां जहां मेट्रो के स्टेशन होते वहां वहां लोगो को एक स्थाई पता भी मिला !! चिड़िया,कबूतर और पक्षियों के लिए मेट्रो स्टेशन ने एक घोसले (घर) का काम किया !
अब धीरे धीरे जनसँख्या को सम्भालने की दृष्टि से और उन्हें अपने गंतव्य तक पहुँचाने में जो मेट्रो एक वरदान के रूप में देखी जा रही थी वही मेट्रो आज अपराध और लाचारी का गढ़ सा आइये करते है दिल्ली मेट्रो की यात्रा - एक अनोखा मजेदार सफर बन गया है ! आज प्रायः रोजाना सफर करने वाले दिल्ली मेट्रो के यात्रियों को ये पता होगा कि दिल्ली मेट्रो में यात्रा करना कितना कष्टदायक होता है !! मेट्रो के डिब्बे में यात्री इतने भर जाते है मानो किसी डिब्बे में आलू बैंगन भर दिये हो ! लोगो को साँस लेना मुश्किल हो जाता है और कोई अस्थमा का मरीज सफर करे तो उसका राम ही जाने !! भीड़ के बीच यात्रियों में कुछ ऐसे यात्री भी होते है जो ऐसी के ठंडी हवा में अपने अपानवायु की आंधी चलाते है ! बेचारे उन लोगो की आत्मा लगभग फट जाती है जिनकी नाक को तेज सूंघने का वरदान मिला होता है और हालत ऐसी हो जाती है कि भीड़ में नाक में हाथ य रुमाल भी नही डाला जाए ! समस्या तब और विकराल रुप ले लेती है जब कोई व्यक्ति चलता फिरता सेंट (परफ्यूम) लगाकर यात्रा करता है  !! एक तरफ तो दूषित वायु और बदबू का प्रकोप तो दूसरी तरफ मीठा जहर !!
राजीव चौक जैसे स्टेशन में ऐसा हाल होता है मानो दो नदियों का संगम हो ! मेट्रो के अंदर से एक वर्ग तो मेट्रो के बाहर से दूसरा वर्ग एक दूसरे से टकराता है ! इसी वक्त आमने – सामने में लोग बुरी तरह से कई बार लोग घायल भी हुये है और इस भीड़ में चोरी भी आम बात है
हफ्ते में कभी न कभी अवश्य मेट्रो में सामान चोरी होते है और अधिक समय में ये भीड़ के वक़्त ही होते है !

कपल्स और बहके हुए युवाओ के लिये ये प्यार प्रदर्शित करने का अच्छा स्थल बन चूका है जहां आप इन्हें बहुत कुछ करते हुए इन्हें आसानी से देख सकते है ! यहाँ भारतीय संस्कृति ही नही अपितु पूरे भारत की संस्कृति और पश्चिमी-विदेशी संस्कृति के पहनावे का प्रभाव और उदाहरण यहां आसानी से देखने को मिलता है पर बहुतायत मात्रा में सुबह-शाम आप विदेशी पश्चिमी संस्कृति के ही दर्शन करते पाएंगे ! यहां महिलाओं के नाम पर अग्रिम बोगी आरक्षित की गयी है ताकि महिलाओं को सुविधा और उनकी सुरक्षा हो जो कि अत्यंत नेक फैसला है पर असुविधा एक बोगी आरक्षित करने से नही रुक य थम सकती ! यहां छेड़खानी,हत्या,चोरी,आत्महत्या भी हर साल देखी जा सकती है !

मेट्रो में आपको अपराध बढ़ाने वाले तत्व भी मौजूद मिलेंगे और इसमें सबसे बड़ा हाथ खुद मेट्रो के प्रचार विभाग का है !! मेट्रो में थूकने के लिए 200 रुपये के जुर्माना का प्रावधान है पर शिखर जैसे गुटका का प्रचार दिखाना अपराध नही है ! कम कपड़ो में पहने अश्लील पोस्टर,फिल्मो का प्रचार आधुनिकरण है और इससे प्रभावित कोई अगर जुर्म करे तो वो अपराध !! सेल्फी लेना मेट्रो में अपराध है पर सेल्फी करते हुए आलिया भट्ट का प्रचार स्वीकार्य है !! देश का भी कुछ यही हाल है ! नियम बनते तो है और बताया तो ये जाता है कि नियम सबके लिये है पर असल में नियम सिर्फ उन्हीं लोगो के लिये है जो आम-आदमी य गरीब वर्ग है जो अज्ञानता से वशीभूत है ! पक्षी अगर मल त्याग करे तो कोई शुल्क नही पर मनुष्य करे तो कीमत तय कर दिया जाता है !! प्रचार का आलम ये है कि अब तो खास तकनीक से मेट्रो को प्रचार वाले पोस्टर से ढक कर चलाया जाता है मानो मेट्रो ट्रेन नही चलता फिरता advertisment बोर्ड हो ! मेट्रो के बाहर भिखारी और गरीब लोगो को लाख दान मिल जाये पर वो हटेगे नही ! दया से प्रभावित होकर आम जनता तो उनके कटोरे सिक्को से भरती ही रहती है पर न जाने बड़े अधिकारी और नेताओ का इस विकट समस्या से कान में जूँ क्यों नही रेंगता ! मेट्रो में सफर अब जेनरल डिब्बो जैसा ही हो गया है ! जो सफर पहले स्टैंडर्ड की पहचान होती थी वो आज मजबूरी और लाचारी की पहचान बन गयी है ! ऐसा नही है कि सफर करने वाले सभी यात्री बिना वाहन वाले है पर समय की बचत से मजबूरन उन्हें ये कष्ट उठाना पड़ता है !

कष्ट का आलम ये है कि वृद्ध,महिलाओ,बच्चों को जो सीट कभी उनके उम्र, सम्मान,माताएं रुप देखकर मिलता था आज थकावट और कष्ट ने उसे भी ढक दिया ! अब उन्हें भी सीट पाने के लिये आग्रह करने पड़ता है ! मेट्रो में मनुष्य कम रोबोट ज्यादा आपको लगेंगे जो बैठकर य खड़े होकर मोबाइल में ईरफ़ोन लगाकर अपने दोनों हाथ के अंगूठे को चला रहे होते है ! अधिकांश में ये देखा जा सकता है और कैंडी क्रश,जेम्स, और अन्य तमाम गेम खेलते हुए रोबोट रूपी लोग पाये जा सकते है ! पूछने पर वे बताते है कि इनसे उनका तनाव कम होता है पर तनाव यदि इनसे कम होता तो आज योग व्यवस्था की जरूरत न होती !! कुछ ऐसे भी एकाग्र लोग होते है जो खड़े होकर नोवल,पुस्तक य अख़बार पढ़ते है ! तो कुछ पिके तरह के
लोग भी होते है जो भावनाओ में उटपटांग बकरबकर करते है ! कुछ ऐसे भी लोग होते है कि धक्का लगने पर WWE करने के लिये तैयार हो जाते है तो कुछ ऐसे भी लोग है जो संगीत,नाचना,पांडित्य करना वही पे शुरू कर देते है ! कोमल प्यारे बच्चो का भी अद्धभुत जमावड़ा होता है और ऐसे बच्चो को देखकर सारा कष्टमय सफर भी आनन्दमय हो जाता है और तब तो और ख़ुशी होती है जब कोई बच्चा आपको देखकर मुस्करा दे य हंस दे !

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कुछ ऐसे भी भले युवा होते है जो नारी,बुजुर्ग,महिलाओं को देखते ही सीट देने का निमंत्रण देते है और आदर्श स्थापित करते है ! तेज आवाज में बात करने वेल्स देहातियों को भी आसानी से देखा जा सकता है और बात करते हुये उनके ख़ुशी को देखकर ऐसा लगता है मानो ट्रैन उनकी है और सवारियों का किराया उन्हें ही मिलने वाला है ! कुछ ऐसे भी लोग होते है जो पूरे मेट्रो में अपनी चीख और छींक से आकर्षक का केंद्र बनते है वैसे ही सूचि में बड़बोले लोगो का भी नाम है पर उनके सामने इनका स्तर थोड़ा कम है !
स्कूल में पढ़ने वाले छोटे बच्चो को भी देखा जा सकता है जो खड़े खड़े कल के होमवर्क के बारे में बात कर रहे होते य मस्ती शरारत कर रहे होते ! कुछ ऐसे भी लोग होते है जो सामान इतना अधिक लाते है कि जनता उनपे भीड़ के कारण भूलवश गिरती रहती है !!
कुछ ऐसे भी लोग होते है जो नेताओ की चाटुकारिता करते रहते है तो कुछ ऐसे भी लोग है जो नेताओं को गालियां दे रहे होते है !
कुछ ऐसे भी विचित्र प्राणी देखे जा सकते है जो मनुष्य रूप में बकरे का भेष धारण कर सलवार सूट पहने होते है तो कुछ ऐसे भी लोग होते है जो सतरंगी कपड़ो में अभद्र भाषा का उपयोग कर रहा होता है ! कई बार भीड़ के कारण सलवार सूट पहनने वालो का सलवार गेट पे भी फंसने की खबर आती रहती है और वे वंशानुगत नियमो का अँधा होकर पालने कस कारण काफी बेइज्जती सहन करते है !

मेट्रो कभी कभी भूल भुलिय्या भी बन जाता है ! भीड़ को देखकर वो भूल जाते है कि उन्हें जाना किधर है और उन्हें याद तब आता है जब कोई आस पास का व्यक्ति उन्हें दिख जाए ! मेट्रो में अश्लील तत्व भी मौजूद है जो अपराधों को जन्म देने के मुख्य कारणों में से एक है और उसमें घी का काम शेलपा शेट्टी के बच्चा जांचने वाले बेहूदा प्रचार करते है मानो ये कहना चाह रही हो आप गर्भ धारण करे और इसे खरीद कर पता करे ! कितना बेहूदा और भयावह है ये इसकी कल्पना भी नही की जा सकती ! प्रचार का स्तर इतना नीचे गिर गया है कि जनता को सही गलत का कुछ आभास ही नही होता और चुप चाप वो देखते सुनते जा रही है
ऐसे प्रचार बाल मन पर असर तो डालती ही है साथ सतज उन्हें जिज्ञासा भी उत्पन्न करती है कि ये सब आखिर है क्या ! नारी बचाओ का अभियान तो चलता है पर युवा वर्ग को चारित्रिक रूप से संस्कारवान बनाओ ये मुहीम न जाने कब चलाया जायेगा !! और देश को अभी मात्र चरित्रवान युवक-युवतियों की आवश्यकता है जो भारत के समस्याओं को जड़ से खत्म करने में सक्षम हो ! मेट्रो ट्रेन का सफर मात्र एक मजबूरी और विकल्प है जिसे सब हंसते हंसते टाल देते है

खैर ये लेख लिखने का मकसद भाइयो,बहनो और यात्रियों को मेट्रो में हो रहे समस्याओं का समाधान ढूढने के लिये प्रेरित करना और उन्हे अपने कष्ट को बताना था क्योंकि कष्ट तभी होता है जब हम सहते है और नियम कानून जनहितों में होने चाहिए न कि मेट्रो के लाभ के आधार पर !!
आप भी इस मेट्रो की यात्रा से परेशान होते होंगे क्योंकि अब आदत हक गयी है इसीलिये फर्क नही पड़ता पर ये न भूले अन्याय और जुल्म सहते सहते ही हम गुलाम बने थे और आज भी वही स्थिति बन रही है !
आगे आइये और आवाज उठाइये

जयहिंद 

वन्देमातरम

Follow सारांश सागर:

Blogger,Writer

स्वदेशी और धर्म की स्थापना हेतु प्रयासरत हूँ ! और छोटे छोटे प्रयासों से खुद में और लोगो में चेतना लाने की कोशिश कर रहा हूँ ! वर्तमान में कम्प्यूटर इंजिनीरिंग की पढ़ाई कर रहा हूँ और साथ साथ ऑनलाइन-ऑफलाइन सामर्थ्य अनुसार स्वदेशी,हिंदुत्व, और सामाजिक हित के प्रयासों को करने की कोशिश में हूँ ! और इस नारे को सबको अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा हूँ कि "देशभक्त बनिये पार्टी भक्त नही" !